बुलंदियों की नई परिभाषा लिख रहे हैं डॉ. भास्कर शर्मा
लगन, पूर्ण मनोयोग से किया गया परिश्रम तथा विषम परिस्थितियों में भी संयम बनाए रखना निश्चय ही भीड़ से अलग पहचान दिलाता है। अपने कर्तव्यों के प्रति निरंतर मनन, मंथन तथा चिंतन बुलंदियों की नई परिभाषा गढ़ने का मूल मंत्र है। कहा जाता है कि व्यक्ति के व्यक्तित्व और कृतित्व की व्याख्या उसके सामाजिक सहभागिता और किए गए योगदान से तय होती हैl सिद्धार्थनगर उत्तर प्रदेश के होमियोपैथिक चिकित्सक डॉ. भास्कर शर्मा ऐसे ही किरदार का नाम है जिसने कड़ी मशक्कत, निष्ठा और त्याग के जरिए खुद को अध्ययन योग्य बनाया है। बहुआयामी प्रतिभा के धनी डॉ. भास्कर शर्मा का जन्म गौतम बुद्ध की पावन नगरी सिद्धार्थनगर के इटवा तहसील के गांव बभनी माफी में शिक्षक पिता व गृहणी माता – पिता के पुत्र का लालन-पालन तथा शिक्षा गांव में हुई। प्राथमिक शिक्षा ग्रहण करते हुए डॉ. शर्मा विभाग द्वारा आयोजित बाल क्रीड़ा प्रतियोगिता में ब...










